जीवन व समाज की विद्रुपताओं, विडंबनाओं और विरोधाभासों पर तीखी नजर । यही तीखी नजर हास्य-व्यंग्य रचनाओं के रूप में परिणत हो जाती है । यथा नाम तथा काम की कोशिश की गई है । ये रचनाएं गुदगुदाएंगी भी और मर्म पर चोट कर बहुत कुछ सोचने के लिए विवश भी करेंगी ।

मंगलवार, 3 मई 2016

सूखे में भी बरसात का फील-गुड


             

   इस वक्त देश के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति है । उस राज्य में भी सूखा मुँह बाए खड़ा है । इधर के सूखे को किसी बरसात का इंतजार है । उधर के सूखे के लिए बरसात कोई सांत्वना लेकर नहीं आती । मतलब उसका गला तर करने के लिए बरसात बेमानी है । इधर का सूखा मौसम की बेईमानी का फल है । उधर का सूखा सरकार की ईमानदारी का ईनाम है । एक को मौसम की नजर लग गई है, तो उस वाले को सरकार की नजर । नजर भले ही इसका-उसका लगा हो, मगर पीड़ित दोनों तरफ समान हैं ।
   इधर का सूखा तो राम-भरोसे है । इसे राम के भरोसे ही छोड़ते हैं । हमारी चिंता तो उधर के सूखे को लेकर अधिक है । सरकार ने कृत्रिम सूखा उत्पन्न कर दिया है । वह कोई मौसम तो नहीं, जो प्राकृतिक सूखा पैदा करे । वह पीड़ित-जनों के धैर्य और उनके बटुवे की गहराई की थाह लेना चाह रही है । साथ ही उनकी कर्मठता, जुझारुपन और जुगाड़ की प्रवृत्ति की भी परीक्षा होनी है । सूखे की मार झेलने के लिए पीठ में दम होना चाहिए । मरियल कोई इसीलिए बनता है, क्योंकि उसमें ये सारे गुण नहीं होते । गला तर करने में तो बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते हैं ।
   जब वहाँ अति-वृष्टि हो रही थी, तो अड़ोसी-पड़ोसी काफी हैरान-परेशान थे । उधर की बाढ़ अतिक्रमण करते हुए इधर आ जाती थी । सामान्य-जन से लेकर सरकार तक, पैसे से लेकर प्रतिष्ठा तक डूबने-उतराने लगते थे । बाढ़ के साथ गाद भी आती थी, जो इधर की लहलहाने की हसरत सँजोते फसलों को दबाकर मार डालती थी । पर इतने के अलावा अनगिनत प्रमुदित जन भी थे, जिनका गला मानो तरावट का तालाब बन जाया करता था । एक से बढ़कर एक तरावट के तराने-खजाने । गले को तर तो तब करने की तरकीब लगानी पड़ती है, जब सूखे की सवारी सीना ठोंककर निकल पड़ती है ।

   अब उधर अनावृष्टि का सामना है । अ़ड़ोसियों-पड़ोसियों के यहाँ खुशी के कई द्वीप पनपने लगे हैं । इधर का गुणवत्ताहीन और त्याज्य जल भी उनके लिए तपते रेगिस्तान में टपकते अमृत-बूँदों के समान है । वे गला तर करना चाहते हैं । उनका सूखा इनके सुख में बदल रहा है । वैसे सूखा हर किसी के लिए नुकसानदेह नहीं होता । सूखे में भी बहुत से लोगों को बरसात का ही फील होता है ।

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