जीवन व समाज की विद्रुपताओं, विडंबनाओं और विरोधाभासों पर तीखी नजर । यही तीखी नजर हास्य-व्यंग्य रचनाओं के रूप में परिणत हो जाती है । यथा नाम तथा काम की कोशिश की गई है । ये रचनाएं गुदगुदाएंगी भी और मर्म पर चोट कर बहुत कुछ सोचने के लिए विवश भी करेंगी ।

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

पापा फेल हो गए

                    
   बधाइयों का तांता लगा हुआ था । इधर मोबाइल की घंटी रुकने का नाम नहीं ले रही थी, उधर लोगों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा था । सिंह-कुटीर आज अपने शबाब पर था । चारों तरफ फूलों की झालरें लगाई गई थीं । नकली इत्र के छिड़काव से कोना-कोना महक रहा था । अंदर ड्राइंग रूम में मिठाइयों को ट्रे की जगह परातों में सजाया गया था । शर्बत और कोल्ड ड्रिंक की बोतलें बाहर कार्टनों में रखी हुई थीं और फ्रिज में जाने की वेटिंग लिस्ट में चल रही थीं ।
   भई, सब तैयारी तो हो गई है न? उन्होंने पत्नी को आवाज लगाई थी,देखना, कुछ रह न जाए । मैंने मीडिया वालों को फोन कर दिया है...वे आते ही होंगे
   हुआ ये था कि उनकी बेटी राज्य वाले बोर्ड से पास हो गई थी । इंटरमीडिएट की परीक्षा में पूरे इलाके में वह टॉप आई थी । इस खबर को उन्होंने दावानल की तरह पूरे शहर में फैला दिया था । प्रतिष्ठा को चार-चाँद लगाने के लिए मीडिया को खबर देना सर्वथा उचित था । वैसे भी मीडिया इस तरह की खबरों को सूँघ ही लेती है । अधिक नंबर आए हैं, इस खबर को सुनकर कम; लेकिन मीडिया आ रही है, इस खबर को सुनकर अधिक लोग इकट्ठा हो गए थे ।
   थोड़ी ही देर में मीडिया वाले पहुँच गए । कैमरा ऑन होते ही लोग अपनी भाव-भंगिमाओं को दुरूस्त कर पोजीशन लेने लगे । कैमरा मैन उन्हें ठेलते हुए लड़की के पास पहुँच गया । ऑर यू रेडी-ऑर यू रेडी की दो-चार प्रोत्साहन-मंत्र के बाद इंटरव्यू शुरु हो गया । हाँ तो, अब आपको कैसा फील हो रहा है?’
   ʻहमें तो अच्छा लग रहा है, पर पापा बहुत खुश हैं । उन्होंने बहुत दौड़-भाग की थी परीक्षा के वक्त
   आप आगे चलकर क्या बनना चाहती हैं?’
   मैं तो आईएएस बनना चाहती हूँ आईएएस ही क्यों?’
   आईएएस बनकर मैं देश-सेवा करना चाहती हूँ देश-सेवा के लिए और भी तो क्षेत्र हैं
   पर यहाँ प्रतिष्ठा और पैसा है जी...हनक के साथ खनक !’ इस बार बेटी के पापा ने जवाब दिया था ।
   अभी अगला प्रश्न आता कि कोई और आ गया था...विघ्न के साथ । शर्मा जी हक्के-बक्के से अंदर घुस आए थे । आते ही वह बोले, हद हो गई यार ! मीडिया सात सीजीपीए वाली की इंटरव्यू ले रही है और उधर मेरी बेटी नौ पाकर यूँ ही बैठी मक्खियां मार रही है
   इनकी बेटी ने इंटरमीडिएट में टॉप किया है ’ यह मीडियाकर्मी की आवाज थी । उधर वह आसमान की तरफ ऐसे देखने लगे थे, जैसे कोई भगाया हुआ मच्छर किसी इंसान की तरफ देखता है...गुस्से में लाल-लाल आँखों से ।
   मजाक मत कीजिए साहब, यह तो हमारी बेटी के साथ ʻउसʼ वाले बोर्ड से इस साल दसवीं में थी ’ शर्मा जी ने विस्फोट कर दिया था । अब सन्न होने की बारी उपस्थित लोगों और मीडिया की थी ।

   सभी को यह समझते देर न लगी कि यहाँ तक पहुँचने के लिए किस तरह पापड़ बेले गए होंगे । मीडिया पोल-खोल की धमकी देती निकल गई...आनन-फानन में । अब वहाँ लगभग सन्नाटा था...थू-थू की कभी-कभार आती आवाजों के बीच । मिठाई पर मक्खियां भिनभिनाने लगी थीं ।

1 टिप्पणी:

  1. सच में हो हल्ला करने वालों का बहुत लंबी फेहरिस्त होती हैं

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